Tuesday, 18 September, 2007

पढ़ब-लिखब की ऐसी-तैसी...

पढ़ाई में फिसड्डी, लेकिन पढ़े-लिखे अपराधियों में पूरे देश में अव्वल। जी हां, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का सच यही है। 57.36 फीसदी की साक्षरता दर के साथ यह देश के 30 राज्यों में 26वें नंबर पर है। लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट अपराधियों के मामले में उत्तर प्रदेश देश के हर राज्य से आगे है। ऐसे में मुझे बचपन की दो कहावतें याद आ जाती हैं। एक जिसे मेरा हमउम्र बाबूराम अक्सर दोहराया करता था कि पढ़ब-लिखब की ऐसी-तैसी, छोलब घास चराउब भैंसी। और दूसरी कहावत, जिसे हम बच्चे उलटकर बोला करते थे कि पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे खराब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे नवाब। आप ही बताइए कि जब एमए-बीए करने के बाद अपराधी ही बनना है तो मां-बाप का पैसा और अपना वक्त जाया करने से क्या फायदा?
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2005 में उत्तर प्रदेश के सज़ायाफ्ता मुजरिमों में से 1048 ग्रेजुएट हैं। इसके बाद 651 ग्रेजुएट मुजरिमों के साथ पंजाब दूसरे और 559 ग्रेजुएट मुजरिमों के साथ मध्य प्रदेश तीसरे नंबर पर है। पोस्ट ग्रेजुएट अपराधियों में भी उत्तर प्रदेश 187 के आंकड़े के साथ पहले नंबर पर है, जबकि मध्य प्रदेश के लिए यह आंकड़ा 180, राजस्थान के लिए 130 और छत्तीसगढ़ के लिए 124 का है।
अगर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट विचाराधीन कैदियों की बात करें तब भी उत्तर प्रदेश सबसे ऊंचे पायदान पर विराजमान है। वहां के विचाराधीन कैदियों में 2029 ग्रेजुएट और 388 पोस्ट ग्रेजुएट हैं। बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और दिल्ली में ग्रेजुएट विचाराधीन कैदियों की संख्या क्रमश: 922, 858, 664 और 654 है। पोस्ट ग्रेजुएट विचाराधीन कैदियों में दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर क्रमश: मध्य प्रदेश (199), झारखंड (178) और राजस्थान (134) आते हैं।
दूसरी तरफ अगर साक्षरता दर की बात करें तो 2001 की मतगणना के मुताबिक साक्षरता का राष्ट्रीय औसत 65.38 फीसदी है, जबकि उत्तर प्रदेश में साक्षरता की दर 57.36 फीसदी है। उत्तर प्रदेश के बाद अरुणाचल प्रदेश (54.74 फीसदी), जम्मू-कश्मीर (54.46 फीसदी), झारखंड (54.13 फीसदी) और बिहार (47.53 फीसदी) का नंबर आता है।
साक्षरता और पढ़े-लिखे अपराधियों के आंकड़ों को आमने-सामने रखकर देखें तो उत्तर प्रदेश की बड़ी विकट तस्वीर सामने आती है। एक तरफ उत्तर प्रदेश के लोग राष्ट्रीय औसत से भी कम पढ़े-लिखे है, दूसरी तरफ जो सबसे ज्यादा पढ़ लिख गए हैं, उनमें पूरे देश की तुलना में सबसे ज्यादा अपराधी निकल रहे हैं। ज़ाहिर है कि उत्तर प्रदेश के पढ़े-लिखे नौजवानों के सामने नौकरी के मौके बेहद कम हैं। और, फिर वह निकल पड़ रहा है अपराध के रास्ते पर।
यह ऐसी क्रूर सच्चाई है, जिसको शायद मायावती की सरकार ज्यादा तवज्जो न दे। इसलिए इस उलटबांसी का जवाब हमें और आपको तलाशना होगा। देश का सबसे बड़ा राज्य अध्ययन का एक मॉडल पेश कर रहा है, एक गुत्थी पेश कर रहा है। इसका व्यावहारिक और तर्कसंगत समाधान निकालना हमारा और आपका दायित्व है।

5 comments:

Shastri JC Philip said...

"पढ़ाई में फिसड्डी, लेकिन पढ़े-लिखे अपराधियों में पूरे देश में अव्वल।"

एक एक करके देश के महान राज्य हर ओर से क्षय दिखा रहे है. अनुसंधान भरे लेख के लिये आभार



-- शास्त्री जे सी फिलिप



प्रोत्साहन की जरूरत हरेक् को होती है. ऐसा कोई आभूषण
नहीं है जिसे चमकाने पर शोभा न बढे. चिट्ठाकार भी
ऐसे ही है. आपका एक वाक्य, एक टिप्पणी, एक छोटा
सा प्रोत्साहन, उसके चिट्ठाजीवन की एक बहुत बडी कडी
बन सकती है.

आप ने आज कम से कम दस हिन्दी चिट्ठाकरों को
प्रोत्साहित किया क्या ? यदि नहीं तो क्यो नहीं ??

Gyan Dutt Pandey said...

उत्तर प्रदेश में शायद डिग्री हासिल करना सरल है. एक बार मेरी ट्रेन उत्तरप्रदेश-बिहार के बार्डर पर उत्तर प्रदेश के स्टेशन पर बहुत देर से खड़ी थी. चलते ही चेन खिंच जा रही थी. पता करने पर ज्ञात हुआ कि बिहार से हुजूम आता है उत्तर प्रदेश में परीक्षा देने चूंकि यहां पास होना (नकल और पास कराने के कांट्रेक्ट) के माध्यम से ज्यादा सरल है बनिस्पत बिहार के! परीक्षा के बाद वापस जाते छात्र चेन खींच रहे थे.
जब शिक्षा का यह स्तर है तो उसके आंकड़ों को क्या सहेजना!

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

अरे भई, आप क्यों परेशान होते हैं. पढ़-लिख कर जो अपराधी नहीं बने , नेता बन गए या अफसर बन गए या कुछ और बन गए, वही क्या कर रहे हैं?

उमाशंकर सिंह said...

सर, विचारों में तो झलक मिलती ही रहती है। अर्से बाद दिखे। इसलिए पोस्ट पर टिप्पणी की बजाए सवाल है कि...तस्वीर पुरानी है या फिर बाल लंबे हो गए हैं?

अनिल रघुराज said...

तस्वीर एकदम टटका है इसी रविवार की, मुंबई की ब्लॉगर मीट में खींची गई थी। हां, बाल जरूर लंबे हो गए हैं, जिन्हें अभी और लंबा करना है।