माथेरान में दर्जनों बंगले उजाड़, निजीकरण ज़रूरी है
माथेरान , महाराष्ट्र में कोंकण इलाके का एक खूबसूरत हिल स्टेशन। अभी पिछले हफ्ते ही वहां सपरिवार तीन दिन रहकर आया हूं। बेटियों की परीक्षा खत्म हुई थी तो सोचा कुछ दिन बाहर घुमाकर ले आऊं। मुंबई में घर से सुबह पांच बजे निकलकर नेरल पहुंचा और फिर 7.30 बजे की टॉय ट्रेन पकड़कर 9.30 बजे तक माथेरान। आपको बता दूं कि माथेरान शायद देश का इकलौता हिल स्टेशन है जहां कोई भी मोटरवाहन नहीं चलते। जहां जाना हो, पैदल जाइए या चाहें तो घोड़े पर बैठकर जा सकते हैं। यही वजह है कि माथेरान में घोड़ों की बहुतायत है और घोड़ों की लीद वहां की आबोहवा की खास पहचान है। तो, माथेरान के सारे प्वाइंट मैं बेटियों और पत्नी के साथ पैदल ही घूमा। समझिए कि हर दिन हम कम से कम 20-25 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते थे। रात तक इतने थक जाते कि बिस्तर पर पड़ते ही नींद के आगोश में डूब जाते थे। सभी के पैर अभी तक दुख रहे हैं। लेकिन इसके अलावा भी दो बातें हैं जो अभी तक मेरे मन को मथे जा रही हैं और जिनका कोई सुसंगत तार्किक समाधान नहीं दिख रहा है। मेरे मोबाइल से खीची गई एक उजाड़ बंगले के गेट की तस्वीर एक तो यह कि हम जगलों के बीच जिधर भी गए वहां प...