मैंने उसे 35 साल पहले मारा था
यह मेरा नहीं, प्रायश्चित में डूबे सुंदर अय्यर का इकबालिया बयान है। वो सुंदर अय्यर जो नाम से ही नहीं, मन और काम से भी उतने ही सुंदर हैं। उनके मन की सुंदरता कैमरे से होते हुए तस्वीरों में उतर जाती है। इन तस्वीरों का उन्होंने एक ब्लॉग बना रखा है। वैसे तो सुंदर जी दक्षिण भारतीय हैं। लेकिन वो नवाबों के शहर लखनऊ में पले-बढ़े हैं। हिंदी पर उनकी अच्छी पकड़ है, लेकिन मुझे नहीं पता कि अंग्रेज़ी में क्यों ब्लॉग लिख रहे हैं। खैर, तो बात उनके 35 साल पुराने ‘गुनाह’ की। इसका मार्मिक चित्रण उन्होंने शनिवार 20 अक्टूबर को अपनी एक पोस्ट में किया है। तब वो 11-12 साल के रहे होंगे। शाम का वक्त था। वो बगीचे में दोस्तों के साथ खेल रहे थे। वहीं पेड़ की टहनी पर एक बुलबुल चहक रही थी। खेल-खेल में उन्होंने एक छोटा-सा पत्थर उस चिड़िया की तरफ फेंका। और वह चिड़िया तड़प कर ज़मीन पर गिर पड़ी। सुंदर जी, घबरा गए। हाय, उनके हाथों ये कैसा पाप हो गया। उन्होंने वहीं बगीचे के एक कोने में बुलबुल को दफ्न कर दिया। लेकिन सुंदर जी आज भी उस दुर्घटना को याद करके सिहर जाते हैं। और, मुझे उनके भीतर बैठा शुद्धोधन का पुत्र राजकुमार सिद्ध...