Posts

Showing posts with the label चिरकुट चिकोटी

एक पोस्ट पर इत्ते टैग! दहाड़ कम, गूंज ज्यादा!!

Image
काफी दिनों से देख रहा हूं कि कुछ ब्लॉगर छटांक भर की पोस्ट पर किलो भर के टैग लगा देते हैं। इधर पोस्ट का आकार तो बड़ा हो गया है, लेकिन टैग का वजन अब भी उस पर भारी पड़ता है। हो सकता है, ऐसे ब्लॉगरों की तादाद ज्यादा हो, लेकिन दो खास ब्लॉगरों पर मेरी नज़र गई हैं। ये हैं – सुरेश चिपलूनकर और दीपक भारतदीप। सुरेश जी श्रेष्ठ ब्लॉगर हैं। झन्नाटेदार अंदाज़ में लिखते हैं, जैसे अभी कोई धमाका कर देंगे। उनकी राष्ट्रभक्ति पर उंगली उठाना पूर्णमासी के चांद में दाग खोजने जैसा है। सेकुलर बुद्धिजीवियों पर तो ऐसे उबलते हैं कि वश चलता तो सबको सूली पर लटका देते या बंगाल की खाड़ी में फेंकवा देते। कल उनकी पोस्ट थी – खबरदार, यदि नरेंद्र मोदी का नाम लिया तो ... शीर्षक और उपसंहार में प्रत्यक्ष रूप से नमो-नम: किया है। लेकिन बाकी सब कुछ परोक्ष है। वो कहते हैं कि देश को ज़रूरत है, “एक सही युवा नेता की, जिसमें काम करने का अनुभव हो, दृष्टि खुली हुई हो, ‘भारत का हित’ उसके लिए सर्वोपरि हो, जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो, परिवारवाद से मुक्त हो, जो देश के गद्दारों को ठिकाने लगा सके, जो अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ‘नये भारत की नई दह...

हिंदी ब्लॉगिंग के डीह बाबा, ब्रह्म और करैले

Image
शुरू में ही हाथ जोड़कर विनती है कि बुरा मत मानिएगा। आदत से मजूबर हूं। छोटा था तो साथ के बच्चों को चिकोटी काटने की आदत थी। कभी-कभी आदतन बड़ों को भी चिकोटी काट दिया करता था। एक बार तो बुजुर्ग विधवा अध्यापिका जी को चिकोटी काटने जा ही रहा था कि मां ने ऐसी आंखें तरेरीं कि तर्जनी और अंगूठा एक साथ में मुंह में चले गए। बड़ा हुआ तो ये आदत लोगों को बेवजह छेड़ने में तब्दील हो गई। प्रमोद इसके भुक्तभोगी रहे हैं। बल्कि उन्होंने ही बताया, तब मुझे पता चला कि मैं ऐसा भी करता हूं। अब ब्लॉगर बन गया हूं तो नए सिरे से चिकोटी काटने को मन मचल रहा है। नादान समझकर माफ कर देंगे, ऐसी अपेक्षा है। तो असली बात पर आया जाए। जो लोग बचपन से लेकर शहरों में पले-बढ़े हैं, उन्हें डीह बाबा, देवी माई का चौरा या बरम (ब्रह्म) देवता की बात नहीं समझ में आएगी। लेकिन गांवों के लोग इन भुतहा ताकतों से अच्छी तरह वाकिफ होंगे। डीह बाबा अक्सर गांव की चौहद्दी पर बिराजते हैं। अगर आप गांव से बाहर कहीं जा रहे हों और गलती से उन्हें नमन करना भूल गए तो वो आपको रास्ता भटका देते हैं। जाना होता है यीरघाट तो आप पहुंच जाते हैं बीरघाट। देवी भाई के ...