एक पोस्ट पर इत्ते टैग! दहाड़ कम, गूंज ज्यादा!!
काफी दिनों से देख रहा हूं कि कुछ ब्लॉगर छटांक भर की पोस्ट पर किलो भर के टैग लगा देते हैं। इधर पोस्ट का आकार तो बड़ा हो गया है, लेकिन टैग का वजन अब भी उस पर भारी पड़ता है। हो सकता है, ऐसे ब्लॉगरों की तादाद ज्यादा हो, लेकिन दो खास ब्लॉगरों पर मेरी नज़र गई हैं। ये हैं – सुरेश चिपलूनकर और दीपक भारतदीप। सुरेश जी श्रेष्ठ ब्लॉगर हैं। झन्नाटेदार अंदाज़ में लिखते हैं, जैसे अभी कोई धमाका कर देंगे। उनकी राष्ट्रभक्ति पर उंगली उठाना पूर्णमासी के चांद में दाग खोजने जैसा है। सेकुलर बुद्धिजीवियों पर तो ऐसे उबलते हैं कि वश चलता तो सबको सूली पर लटका देते या बंगाल की खाड़ी में फेंकवा देते। कल उनकी पोस्ट थी – खबरदार, यदि नरेंद्र मोदी का नाम लिया तो ... शीर्षक और उपसंहार में प्रत्यक्ष रूप से नमो-नम: किया है। लेकिन बाकी सब कुछ परोक्ष है। वो कहते हैं कि देश को ज़रूरत है, “एक सही युवा नेता की, जिसमें काम करने का अनुभव हो, दृष्टि खुली हुई हो, ‘भारत का हित’ उसके लिए सर्वोपरि हो, जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो, परिवारवाद से मुक्त हो, जो देश के गद्दारों को ठिकाने लगा सके, जो अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ‘नये भारत की नई दह...