मोर ही क्यों नाचता है, मोरनी क्यों नहीं...

पशु-पक्षी जगत में यह सामान्य नियम है कि नर के चयन का अधिकार मादा के पास ही होता है। जो भी जीव जोड़ा बनाते हैं, उनमें मादा जब नर की काबिलियत को लेकर हर तरीके से संतुष्ट हो जाती है कि तभी उसे हरी झंडी दिखाती है। कई पक्षी तो ऐसे हैं, जिनमें नर पहले घोंसला बनाकर उसको हरसंभव तरीके से सजाकर पेश करते हैं। मादा पूरी ऐंठ के साथ आती है, एक-एक घोंसले का मुआयना करती है। जिस घोंसले की सजधज, डिजाइन सबसे अच्छी होती है, उसी के डिजाइनर नर को वह अपना साथी चुनती है।
मादा इशारा करती है कि वह तैयार है। बस उसकी गंध से बावले होकर नर उसके पीछे लग जाते हैं। शुतुरमुर्ग तो दोनों पंख फैलाकर इस अदा से नाचता है मानो बाकायदा कहीं से डांस की ट्रेनिंग लेकर आया हो। पक्षियों में नर ज्यादातर अपनी अदाएं दिखाकर मादा को रिझाता है, जबकि पशुओं में नर लड़-झगड़कर अपनी ताकत साबित करता है और मादा को पाने का अधिकारी बनता है। जहां चिड़ियों में अदाकार नर चुना जाता है, वहीं पशुओं में सबसे ताकतवर। लेकिन चयन का अधिकार मादा के पास ही रहता है।

लेकिन पशु-पक्षी और इंसान के जोड़े बनाने में फर्क है। पशु-पक्षी अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाने के लिए जोड़े बनाते हैं। अपनी सुरक्षा के लिए झुंड में भी रहते हैं। लेकिन इससे उनका परिवार नहीं बन जाता। प्राकृतिक रूप से कोई ज़रूरी नहीं है कि मां-बाप और बच्चे एक साथ एक परिवार में रहें। लेकिन इंसान अभी की सोचता है, आगे की योजना बनाता है, उसके हिसाब के काम करता है। इंसान की इसी फितरत का नतीजा होता है परिवार और समाज। फिर यही परिवार और समाज उसकी मूल पशु-प्रवृति को रिफाइन करता चलता है।
वैसे, वैज्ञानिकों की मानें तो साथी के चयन का फैसला दिमाग के न्यूरॉन्स करते हैं। आकर्षण, फिदा होने और आखिरकार प्यार तक पहुंचने के दौरान ये न्यूरॉन्स जमकर रहस्यमयी तरीके से डूबते-उतराते हैं, नृत्य करते हैं। न्यूरॉन्स की इन्हीं हरकतों के चलते लोगों पर प्यार का नशा छा जाता है। पाया गया है कि प्यार की दीवानगी में इंसान के दिमाग का वही हिस्सा आंदोलित होता है जो सिगरेट, शराब या जुए की तलब के समय बेचैनी दिखाता है। यकीनन, परिवार और समाज ने इंसान के जोड़े बनाने के प्राकृतिक नियम में काफी तब्दीलियां की है।
वैसे, कभी आपने गौर किया है कि जानवर कभी बलात्कार नहीं करते। इंसान या ओरांगउटांग जैसे उसके कुछ पूर्वजों में ही यह प्रवृति पाई जाती है। फिर भी बलात्कारी को हम कहते हैं कि उसने जानवरों जैसी हरकत की है?
Comments
अभी कल ही एक मित्र से मिला. पति पत्नी के नाम पर दोनों ही पुरुष हैं और १० सालों से साथ रह रहे हैं, शायद दोनों ही नाचते हों रिझाने को..मगर एक माह पूर्व एक बच्चा गोद ले लिया है..उसके भविष्य को ले चिंतित हूँ..कि वो कैसा नाचेगा बड़ा हो कर..मोर कि मोरनी.
आप भी न?!!! बस प्रश्न डाल देते हैं.
हम तो अब भौजी का ही ब्लॉग पढ़ा करेंगे. आपका नहीं. हा हा!! एड्रेस हमारे पास है, भाभी जी ने दे दिया है.