Monday 17 September 2007

9/11 स्वांग था? ग्रीनस्पैन के खुलासे का निहितार्थ

अमेरिका में इन दिनों जबरदस्त चर्चा है कि 11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और पेंटागन पर हुआ हमला प्रायोजित था। यह हमला पूरी तरह बुश प्रशासन द्वारा नियोजित था। पेंटागन को कोई नुकसान नहीं होने दिया गया क्योकि वहां जहाज नहीं मिसाइल दागा गया था और जहां पर यह मिसाइल दागा गया था, पेंटागन का वह हिस्सा पहले ही खाली कराया जा चुका था। यहां तक संदेह किया जा रहा है कि लादेन और बुश प्रशासन में इस हमले के लिए पूरी मिलीभगत थी। इस मिलीभगत से जिस दिन वाकई पूरे प्रमाणों के साथ परदा उठेगा, उस दिन पूरी दुनिया में तहलका मच जाएगा।
ऐसे तहलके का ट्रेलर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पूर्व चेयरमैन एलन ग्रीनस्पैन ने आज जारी की गई अपनी किताब ‘The Age of Turbulence’ में दिखा दिया है। ग्रीनस्पैन अमेरिका की मौद्रिक नीतियों के पितामह रहे हैं। वो 1987 से 2006 तक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन थे और बुश से लेकर इस दौर के हर राष्ट्रपति ने उनकी तारीफ की है। ग्रीनस्पैन ने इस किताब में लिखा है, “मुझे दुख है कि जो बात हर कोई जानता है उसे स्वीकार करना राजनीतिक रूप से असुविधाजनक है : इराक युद्ध की मुख्य वजह तेल है।”
अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया में अब तक के सबसे ज्यादा नफरत किए जाने राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, उपराष्ट्रति डिक चेनी, तत्कालीन रक्षा मंत्री रोनाल्ड रम्सफेल्ड और उप-रक्षा मंत्री पॉल वूल्फोविट्ज ने मई 2003 में ढोल बजा-बजाकर कहा था कि इराक पर हमले की वजह हैं जनसंहारक हथियार। तीन साल बाद खुद रम्सफेल्ड को मानना पड़ा कि इराक के पास जनसंहारक हथियार नहीं हैं। अब ग्रीनस्पैन ने सब कुछ साफ कर दिया है कि इस हमले की असली वजह जनसंहारक हथियार नहीं, बल्कि पेट्रोलियम तेल के विपुल भंडार हैं। वैसे पिछले ही महीने अमेरिका के उप-रक्षा मंत्री वूल्फोविट्ज ने सिंगापुर में यह कहकर फुलझड़ी छोड़ दी थी कि इराक तेल के समुद्र पर तैरता है।
यह सच भी है कि मध्य-पूर्व में दुनिया के दो-तिहाई तेल भंडार हैं और इनकी कीमत भी सबसे कम है। हमें यह भी याद रखना चाहिए कि जब बुश और चेनी ने सत्ता संभाली थी तब अमेरिका तेल और प्राकृतिक गैस के भयानक संकट से गुजर रहा था। ऊपर से उसे विश्व बाज़ार में घटती आपूर्ति के बीच चीन और भारत जैसे तेज़ी से बढते देशों से होड़ लेनी पड़ रही थी। अमेरिकी कंपनियों की निगाहें इराक के तेल भंडार पर टिकी थीं। पहले 9/11 का स्वांग रचा गया। अफगानिस्तान पर हमला करके अमेरिका ने मुस्लिम आतंकवाद के खिलाफ मुहिम के लिए विश्वसनीयता हासिल करने की कोशिश की। फिर 2003 में इराक पर हमला बोल दिया। अमेरिकी अवाम चुप रहा क्योंकि उसे लगा कि अगर इराक पर हमले से उनकी ऊर्जा ज़रूरतें पूरी हो जा रही हैं तो इसमें हर्ज क्या है।
लेकिन आज अमेरिकी अवाम भी युद्ध की विभीषिका की चुभन महसूस करने लगा है। इस युद्ध में मारे गए इराकियों की संख्या का अनुमान अलग-अलग है। कोई कहता है कि 75,000 लोग मारे गए हैं तो कोई कहता है कि ये संख्या डेढ़ लाख से लेकर 6.55 लाख हो सकती है। अब आप ही बताइये कि इतने लोगों की हत्या और पूरी की पूरी सभ्यता को तबाह करनेवाले युद्ध अपराधी के खिलाफ क्या कार्रवाई होनी चाहिए? जब सद्दाम को फांसी लगाई जा सकती है, सर्बिया के राष्ट्रपति स्लोबोदान मिलोशेविच के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में युद्ध अपराधी का मुकदमा चलाया जा सकता है तो झूठ बोलकर लाखों बेगुनाह इराकियों की हत्या करनेवाले जॉर्ज डब्ल्यू बुश से क्या सलूक किया जाना चाहिए? ग्रीनस्पैन ने सबूत पेश कर दिया है, फैसला विश्व जनमत को करना है, जिसमें हम और आप भी शामिल हैं।

5 comments:

Neeraj नीरज نیرج said...

यहां तक संदेह किया जा रहा है कि लादेन और बुश प्रशासन में इस हमले के लिए पूरी मिलीभगत थी। इस मिलीभगत से जिस दिन वाकई पूरे प्रमाणों के साथ परदा उठेगा, उस दिन पूरी दुनिया में तहलका मच जाएगा।
यह पंक्तियां एलन ग्रीनस्पैन की हैं या सिर्फ़ चर्चा है? मैंने प्रयास किया ढूंढने का कि किताब The Age of Turbulence: Adventures in a New World के कुछ अंश गूगल पर मिल जाएं किंतु लादेन वाला अंश दिखा नहीं. ५३१ पन्नों की किताब के बारे में इतनी जल्दी क्या कहा जा सकता है. एक दिन भी नहीं हुआ है इसे.. उम्मीद है कि आगे कुछ और पढ़ने मिलेगा.

इसके क्या निहितार्थ हो सकते हैं. यह भी विचारणीय है. इतना तो अपन मानते आए हैं कि मध्यपूर्व की नीति में तेल का खेल है.

अनिल रघुराज said...

नीरज जी, यह किताब में नहीं है। जैसा मैंने कहा कि ऐसी बातें चर्चा में हैं। बस कयास लगाए जा रहे हैं। मैंने जो लिंक दिया है, उस पर बस वही लाइनें देखी हैं जो मैंने कोट की हैं।

neeshoo said...

आप के इस लेख को पढ़कर विश्वास नही होता पर कोई राढ्ट्रपित अपने देश से कैसे दगा कर सकता है पर ये सही है तो बहुत ही दुखद बात हैयहां तक संदेह किया जा रहा है कि लादेन और बुश प्रशासन में इस हमले के लिए पूरी मिलीभगत थी। इस मिलीभगत से जिस दिन वाकई पूरे प्रमाणों के साथ परदा उठेगा, उस दिन पूरी दुनिया में तहलका मच जाएगा।
यह पंक्तियां एलन ग्रीनस्पैन की हैं या सिर्फ़ चर्चा है? मैंने प्रयास किया ढूंढने का कि किताब The Age of Turbulence: Adventures in a New World के कुछ अंश गूगल पर मिल जाएं किंतु लादेन वाला अंश दिखा नहीं. ५३१ पन्नों की किताब के बारे में इतनी जल्दी क्या कहा जा सकता है. एक दिन भी नहीं हुआ है इसे.. उम्मीद है कि आगे कुछ और पढ़ने मिलेगा.

इसके क्या निहितार्थ हो सकते हैं. यह भी विचारणीय है. इतना तो अपन मानते आए हैं कि मध्यपूर्व की नीति में तेल का खेल है.

hindiacom.blogspot.com said...

आपका विश्‍लेषण सच के निकट लगता है और यह त्रासद है-कुमार मुकुल

eklavya said...

Transcript of 9/11 Presentation Before Japanese Parliament
http://www.truthnews.us/?p=1705