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कुरान पर हाथ रखकर झूठी गवाही

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हमारे धर्म-ग्रंथ सत्ता में बैठे लोगों के लिए किस तरह मजाक बन गए हैं, इसका सबूत है सरबजीत के मामले के मुख्य गवाह शौकत सलीम की ये स्वीकारोक्ति कि, “सरकारी वकील ने मुझे बताया कि इस आदमी ने विस्फोट किए और वह दोषी है। वकील ने मुझसे कहा कि मुझे भी ऐसा ही कहना है और मैंने कह दिया।” शौकत सलीम लाहौर का रहनेवाला वो शख्स है जिसके पिता और एक अन्य रिश्तेदार उस विस्फोट में मारे गए थे जिसका दोष सरबजीत पर लगाया गया है। एजेंसी की खबर के मुताबिक सलीम ने एक भारतीय टीवी चैनल से बातचीत में कहा है कि उस पर सरबजीत के खिलाफ गवाही देने के लिए दबाव बनाया गया था और अदालत में सरबजीत के खिलाफ बोलने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं था। शौकत सलीम का कहना है कि उसने अदालत में पेशी से पहले न तो सरबजीत को कभी देखा था और न ही उसे यह भरोसा था कि वह विस्फोटों में शामिल हो सकता है। शौकत सलीम ने यहां तक कहा कि पाकिस्तान में तमाम ताकतवर लोग तक पुलिस से डरे रहते हैं। सलीम ने बताया कि जब उसको अदालत में लाया गया तो उसने न्यायाधीश को बताया कि सरबजीत ने ही विस्फोट किए थे। सलीम के मुताबिक न्यायाधीश ने उसे सुना और जाने दिया। सलीम का...

घट रहे हैं हिंदी न्यूज़ चैनलों के दर्शक

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हिदी न्यूज़ चैनलों में खली-बली, सांप-छछूंदर, राम-रावण, शिव-पार्वती और सास-बहू से लेकर भूत-प्रेत का जो नाटक चलता है, जो अपराध और सनसनी फैलाई जाती है, जिस तरह अंधविश्वासों को सच बताया जाता है, उसके पीछे का तर्क है कि बाज़ार में खड़े हैं तो बिकाऊ नहीं होंगे तो कैसे काम चलेगा। टीआरपी के लिए भागमभाग लाज़िमी है। लेकिन क्या आपको पता है कि टेलिविजन के कुल दर्शकों में हिंदी न्यूज के दर्शक कितने हैं? इस साल के पहले हफ्ते (30 दिसंबर 2007 से 5 जनवरी 2008) में यह आंकड़ा था 5.1 फीसदी। यानी हिंदी न्यूज़ चैनलों को 100 में से केवल पांच दर्शक मिले थे। चौंकानेवाली बात यह है कि साल के 15वें हफ्ते (8 से 12 अप्रैल 2008) में यह आंकड़ा घटकर 4 फीसदी रह गया है। ज़ाहिर है कि गुजरे साढ़े तीन महीनों में हिंदी चैनलों ने अपने 20 फीसदी दर्शक गवां दिए हैं। टैम मीडिया रिसर्च के मुताबिक इस समय दर्शकों में सबसे बड़ा हिस्सा हिंदी के मनोरंजन चैनलों का है। इन्हें लगभग 22 फीसदी दर्शक देखते हैं। अब चूंकि ज्यादातर न्यूज़ चैनल इनफोटेनमेंट चैनल होते जा रहे हैं, इसलिए शायद दर्शकों को लगने लगा है कि जब इंटरटेनमेंट ही देखना है तो ...

मोर मारकर खा गया कांग्रेस का कॉरपोरेटर

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कांग्रेस पार्टी के युवराज राहुल गांधी इधर जब से भारत की खोज पर निकले हैं, लगातार पार्टी के अंदरूनी लोकतंत्र की बात कर रहे हैं। कहते फिर रहे हैं कि, “भारत एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर यहां की किसी भी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है, चाहे वह कांग्रेस हो, बीजेपी हो या कोई दूसरी पार्टी।” यह अलग बात है कि राहुल गांधी के पार्टी लोकतंत्र की पहुंच केवल निचली इकाइयों तक है और कांग्रेस वर्किंग कमेटी में लोकतंत्र का वो जिक्र तक नहीं करते। लेकिन उस पार्टी में निचली इकाइयों तक वे लोकतंत्र कैसे लाएंगे जो ऊपर से लेकर नीचे तक निहित स्वार्थों का जमघंट बन चुकी है, जिसके नेताओं को लोकशाही तो छोड़िए राष्ट्रीय प्रतीकों तक की परवाह नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में सांगली की पुलिस ने दो दिन पहले ही कांग्रेस के एक कॉरपोरेटर को गिरफ्तार किया है जिस पर आरोप है कि उसने पुणे में कटराज के राजीव गांधी चिड़ियाघर से दो पिजड़ों में बंद पांच मोरों को चुरा लिया था। सांगली के एसपी कृष्ण प्रकाश के मुताबिक, इस कॉरपोरेटर ने मोरों की चोरी खाने के मसकद से की थी। अल्लाबक्श काज़ी नाम का यह कॉर...