Saturday 31 January 2015

शर्म उनको मगर क्यों नहीं आती?



घरवाले और रिश्तेदार सभी बोलते हैं कि मोदी या भाजपा कुछ भी बोले या करें, उसका विरोध तुम क्यों करते हो! करना है तो कांग्रेस करे या आम आदमी पार्टी करे। तुम्हें इस विरोध से क्या मिल जाएगा? मैं कहता नहीं, पर मानता हूं कि यह देश उतना ही मेरा है जितना किसी नेता या ब्यूरोक्रेट का। इसलिए जहां भी देश के साथ धोखा-फरेब किया जा रहा हो, झूठ बोला जा रहा हो, वहां सच को सामने लाना मेरा भी दायित्व बनता है। 

मोदी जी ने साल भर पहले पहचान की राजनीति को खत्म करके विकास की राजनीति का दम भरा था। यही वजह है कि भारतीय अवाम के मुखर तबके ने उन्हें वोट देकर दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचाया। लेकिन आज उन्हीं मोदी जी ने जब दिल्ली को देश की पहचान से जोड़कर जनता का आशीर्वाद मांगा तो मन में सहज सवाल उठा कि विकास की राजनीति इतनी जल्दी कहां और क्यों गायब हो गई? क्या दिल्ली में उसको सत्ता नहीं मिलनी चाहिए जो दिल्ली की समस्याओं को अच्छी तरह समझता है और जिनके समाधान का पूरा ब्लूप्रिंट जिसके पास है!
दूसरों के नारे को चुराने में माहिर मोदी जी ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वे बिना हल्ला मचाए शांत भाव से काम कर रहे हैं। इस सिलसिले में उन्होंने 9 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं के बैंक खाते में कैश सब्सिडी डालने का जिक्र किया। पहली बात यह कि डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम उस कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की हुई है जिसके ज़माने में मोदी जी ने 12 लाख करोड़ रुपए के घोटाले होने की बात की।

दूसरी बात यह कि अभी तय भाव पर उपभोक्ता को गैस सिलिंडर मिल जाता था। अब बाज़ार भाव पर मिलेगा और बाज़ार भाव हमेशा ऊपर-नीचे होता रहता है। ऐसे में किस मूल्य को आधार बनाकर सरकार उपभोक्ता के बैंक खाते में सब्सिडी डालेगी? इस स्कीम से तो गैस के ब्लैक होने का नया ज़रिया खुल जाएगा और दुकानदार को उपभोक्ता से अनाप-शनाप दाम वसूलने का मौका मिल जाएगा।
कितने शर्म की बात है कि हमारी राष्ट्रीय राजधानी के 33.41 लाख घरों में से केवल 20 लाख घरों तक पानी पाइपलाइन से पहुंचता है। बाकी 13.41 लाख घरों के 50 लाख से ज्यादा लोग हैंड पम्प, बोरिंग, टैंकर, प्रदूषित यमुना, नहरों या तालाबों से पानी पीने को मजबूर हैं। मोदी जी को दिल्ली में जमे हुए आढ़े आठ महीने हो चुके हैं। अगर उनमें अवाम के प्रति ज़रा-सा भी संवेदनशीलता होती तो इस दौरान दिल्ली में कम के कम पानी की समस्या को वे हल कर चुके होते। मोदी जी! क्या इससे देश और सरकार की छवि खराब नहीं होती कि वह अपनी राजधानी में ही 40.13% घरों तक पानी नहीं पहुंचा सकी है?