Posts

Showing posts with the label अर्थकाम

समाज को प्रभुतासंपन्न बनाने की कोशिश है अर्थकाम

अर्थकाम हिंदी समाज का प्रतिनिधित्व करता है। यह 42 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले उस समाज को असहाय स्थिति से निकालकर प्रभुतासंपन्न बनाने का प्रयास है जो घोड़ा बना है लेकिन जिसका घुड़सवार कोई और है। इसका अधिकांश हिस्सा ग्राहक है, उपभोक्ता है, लेकिन वह क्या उपभोग करेगा, इसे कोई और तय करता है। वह अन्नदाता है किसान के रूप में, वह निर्यातक है सप्लायर है छोटी-छोटी औद्योगिक इकाइयों (एमएसएमई) के रूप में, लेकिन वह कितना और कौन-सा अनाज पैदा करेगा, कौन-सा माल किसको सप्लाई करेगा, इसे कोई और तय करता है। इसका बड़ा हिस्सा नौकरी-चाकरी करता है, मालिक-मुख्तार नहीं है। वह कमाई करता है, वर्तमान से, भविष्य की अनहोनी से डरकर पैसे भी बचाता है। वह कभी-कभी इतना जोखिम भी उठा लेता है कि लॉटरी खेलता है। शेयर बाजार में सट्टेबाजी का मौका मिले तो डे-ट्रेडर भी बन जाता है। निवेश करता है, लेकिन हमेशा टिप्स के जुगाड़ में रहता है। जानता नहीं कि देश का वित्तीय बाजार उसे सुरक्षित निवेश के मौके भी देता है। जानता नहीं कि देश का वित्तीय बाजार किसी के बाप की बपौती नहीं है। अभी भले ही यह सच हो कि अंग्रेजी में बोलने-सोचने वाले पां...

किसान और कृषक कैसे एक हो गए!!...

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण के अंत में कहा है कि यह बजट आम आदमी का है। यह किसानों, कृषकों, उद्यमियों और निवेशकों का है। इसमें बाकी सब तो ठीक है, लेकिन किसान और कृषक का फर्क समझ में नहीं आया। असल में वित्त मंत्री ने अपने मूल अंग्रेजी भाषण में फार्मर और एग्रीकल्चरिस्ट शब्द का इस्तेमाल किया है। लेकिन वित्त मंत्रालय के अनुवादक बाबुओं ने शब्दकोष देखा होगा तो दोनों ही शब्दों का हिंदी अनुवाद किसान, कृषक और खेतिहर लिखा गया है तो उन्होंने बजट भाषण के हिंदी तर्जुमा में इसमें से एक के लिए किसान और दूसरे के लिए कृषक चुन लिया। वैसे तो फार्मर और एग्रीकल्चरिस्ट का अंतर भी साफ नहीं है क्योंकि अपने यहा फार्मर बड़े जोतवाले आधुनिक खेती करनेवाले किसानों को कहा जाता है और एग्रीकल्चरिस्ट भी वैज्ञानिक तरीके से खेती करनेवाले हुए। हो सकता है कि प्रणब मुखर्जी अपने मंतव्य में स्पष्ट हों क्योंकि जब वे उद्यमियों और निवेशकों के साथ इनका नाम ले रहे हैं तो जाहिर है उनका मतलब बड़े व आधुनिक किसानों से होगा। नहीं तो वे स्मॉल व मार्जिनल फार्मर/पीजैंट कह सकते थे। लेकिन बाबुओं ने तो बेड़ा गरक क...