Wednesday 15 August 2007

क्या तरक्की है हाउसवाइफ की!

दो दिन पहले मेरी वाइफ-हाउसवाइफ को ऐसी सूचना हाथ लग गई कि उनकी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा। क्यों और कैसे, आप खुद सुन लीजिए उन्हीं की जुबानी...

आज मैंने अर्द्धांगिनी होने के नाते इनका ब्लॉग हथिया लिया है, एक ख़ास ऐलान करने के लिए। आज मारे खुशी के मैं गदगद हूं। मुझे बिन मांगे एक ऐसी पदवी मिल गई है जो अपने यहां खूब नंबर लाकर, लाखों खर्च करने के बाद ही हासिल होती है। मन कर रहा है कि नए कपड़े पहन काला टोप सिर पर रख डिग्री लेने पहुंच जाऊं। पतिदेव ने बड़े सुन्दर-सुन्दर नामों से पुकारा है। बच्चों ने कई नए प्यारे नाम गढ़े हैं। मां-बाप ने भी खूब लाड़ से बुलाया है। पर अब सब के सब मात खा गए। ऐसा सम्मान कभी किसी ने, वह भी बिना गरज के नहीं दिया भाई।
पहले तो हम सिर्फ पत्नी (वाइफ) हुआ करती थीं। फिर घर की पत्नी (हाउसवाइफ) बन गईं। आगे बढ़कर हमने घर बनानेवाली (होममेकर) की पदवी हासिल की। और अब हमने छलांग लगा ली है। ऐसी तकनीकी तरक्की की उम्मीद भी हमने नहीं की थी।
अरे! अब हमें घरेलू इंजीनियर (डोमेस्टिक इंजीनियर) कहकर नहीं पुकारा तो बेलन ज़रूर खाएंगे। भाषाई पुलिस को कोटि-कोटि धन्यवाद।
Newspeak के अनुसार भाषाई पुलिस ने पोलिटिकली करेक्ट बनने के चक्कर में हमारे हिंदी अफसरों को भी मात दे दी है। कुछ और नमूने –
Ugly woman- plain jane नहीं visually challenging
Handicaped – physically challenged नहीं handicapable
Broken home – dysfunctional family
Psycho – pathologically high spirited


हींग(हर्र) लगे न फिटकरी। देख रहे हैं फिर भी कैसा चोखा रंग आ रहा है, कैसी उन्नति हो रही है!

4 comments:

अभय तिवारी said...

हम तो लात खाए बैठे हैं.. आज तक पोलिटिकिली करेक्ट नहीं हो पाए..

harshvardhan said...

अच्छा है सर, घर का भी समय ब्लॉगिंग को देकर घर में चैन से रहने का अच्छा नुस्खा निकाला है आपने।

अजित वडनेरकर said...

बढ़िया..

राजेश कुमार said...

अनिल जी,भाभी जी को कितना भी ब्लॉगिंग में वयस्त कर दें बेलन तो खाना ही पड़ेगा। क्योंकि बेलन ही एक ऐसा हथियार है जो परिवार को सुखी और उर्जावान बनाता है।