Monday 3 December 2007

अंधा जा पहुंचा अप्सरा का नाच देखने!

आज मुझे दिल्ली वालों से जलन हो रही है, क्योंकि जिस समय मैं यह पोस्ट लिख रहा हूं, ठीक उसी समय दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर में एक अद्भुत प्रेम कहानी पर बने नाटक ‘Bombay Black’ का मंचन हो रहा है, वह भी हिंदी में। करीब दो घंटे के इस नाटक का निर्देशन अनहिता ने किया है। वैसे, दिल्ली वाले इसे कल शाम भी सात बजे देख सकते हैं। लेकिन मैं बेचारा मुंबई से वहां नहीं पहुंच सकता।

इस नाटक की पृष्ठभूमि मुंबई की है। इसे लिखा है अनोश ईरानी ने। यह एक अंधे और एक नर्तकी की प्रेम कहानी है। कहानी में प्रेम का हर आवेग है, उफान है। धोखा है, बदला है। मुंबई के मुख्य इलाके कोलाबा में पद्मा नाम की एक कड़क किस्म की महिला है, जो अपनी बेटी अप्सरा का मनमोहित करनेवाला नाच दिखाने के लिए लोगों से अच्छी-खासी रकम लेती है। अप्सरा बेइंतिहा खूबसूरत है और उसका नाच जो भी देखता है, उस पर लट्टू हो जाता है।

एक दिन कमल का नाम का रहस्यमय अंधा व्यक्ति पद्मा के पास पहुंचता है और कहता कि वह उसकी बेटी अप्सरा का नाच अकेले में देखना चाहता है। सोचिए, अंधा नाच देखना चाहता है! कमल का रहस्य धीरे-धीरे खुलता है तो पता चलता है कि उसका मां-बेटी से पुराना वास्ता रहा है। फिर कहानी ऐसे-ऐसे मोड़ लेती है, जिसके बारे में मुझे पता नहीं है। हां, इतना पता है कि जो कुछ भी है, वह बड़ा रूमानी और रोमांचक है। अगर आप में से कोई भी इस नाटक को देखे तो मेरी गुजारिश है कि इस पर ठीक से ज़रूर लिखिएगा। मुझे तो एक अच्छी फोटो दिख गई तो खानापूरी के लिए मैंने लिख मारा।

6 comments:

सचिन लुधियानवी said...

ये भाई हम भी आपके दुख में शरीक हैं. सह अनुभूति रखते हैं आपसे. लेकिन ई सब दिल्ली वाला तो एकदमे बुडबक है. घरे में एत्ता बढिया नाटक हो रहा है और सब लोगन ने रजाई में छुपके चाय की चुस्की के साथ लरकिया सब का डांस देख रहा है. देखत हैं कल का छुट्टी मिल गया तो अभिए रात में निकल लेंगे और कल संजा बिरिया ई वाला नाटक देखेंगे. बहुत क्यूरेसिटिया दिए हैं आप. ई साला नौकरिया जो न कराए

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

अच्छा विश्लेषण, सही लम्बाई, एक चित्र, एवं गजब का शीर्षक. जनाब आप चिट्ठाकारी की सीढियां बहुत तेज चढ रहे हैं.

इस लेख को पढने में 3 मिनिट भी नहीं लगा, 30 मिनिट सोचने का मसाला मिल गया, एवं एक महत्वपूर्ण कथा के मंचन की जानकारी मिली. कोई भी व्यस्त लेकिन चिट्ठाप्रेमी पाठक इससे अधिक क्या मांग सकता है. इसके साथ ही साथ हम आपको चिट्ठा-दक्ष की पदवी दे रहे हैं. अब गुरुदक्षिणा देने का समय आ गया है.

फांट को एक बिंदु बडा करके देखें, शायद अधिक पठनीय लगे. फांट/पठनीयता "आवरण" के साथ ऐसा जुडा हुआ है कि करके देखने पर ही अंतिम निर्णय लिया जा सकता है -- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
हर महीने कम से कम एक हिन्दी पुस्तक खरीदें !
मैं और आप नहीं तो क्या विदेशी लोग हिन्दी
लेखकों को प्रोत्साहन देंगे ??

अनिल रघुराज said...

शास्त्री जी, हौसला-अफजाई के लिए शुक्रिया। गुरु दक्षिणा देने के लिए हमेशा तैयार हूं, आप बस आदेश करें। फॉन्ट का भी कुछ करके देखता हूं। ब्लॉगर में असल में फॉन्ट को एक बिंदु बढ़ाने का विकल्प अभी नहीं दिख रहा। स्मॉल, नॉरमल, लार्जर, लार्जेस्ट का ही विकल्प है। फिर भी आजमा कर देखूंगा। अंत में फिर, इस नाचीज़ की पीठ थपथपाने के लिए धन्यवाद।

bhupen said...

देखता हूं आज

उन्मुक्त said...

इसे तो अब देखना पड़ेगा।

Kakesh said...

जानकारी के लिये धन्यवाद.