Friday 25 April 2014

मोदी से गांधीवादी चिंतक कनक तिवारी के दस सवाल

1. मोदी ने महात्मा गांधी की स्मृति में गुजरात में अहिंसा विश्वविद्यालय खोलने का ऐलान सालों पहले किया था। उस अहिंसा विश्वविद्यालय का क्या हुआ? अहमदाबाद स्थित महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम के लिए गुजरात सरकार क्या कुछ करती है? उस आश्रम को विश्व प्रसिद्ध हेरिटेज के रूप में विकसित किए जाने का मोदी प्रशासन का कोई इरादा क्यों नहीं है?

2. गुजरात के विकास की कथा कहते मोदी उन प्रतिमानों को लेकर श्वेतपत्र क्यों नहीं निकालते जो उनके कार्यकाल के दौरान देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय औसत से भी पिछड़े हुए हैं? कृषि में पिछले एक दशक में 10 प्रतिशत से ज्यादा विकास दर का दावा कहां के आंकड़ों पर आधारित है क्योंकि योजना आयोग लेकर वाई के अलघ के अध्ययन में यह दर 5 प्रतिशत के आसपास है? 

3. सरदार पटेल की अंत्येष्टि में नेहरू के शामिल होने, चीन की शैक्षणिक विकास दर, तक्षशिला को बिहार में होने जैसी बीसियों इतिहास व भूगोल की गलतियां करने को लेकर मोदी ने खंडन या माफीनामा क्यों जारी नहीं किया? 

4. कश्मीर की विशेष स्थिति की धारा-370 को समाप्त करने का ऐलान करनेवाले नरेंद्र मोदी इसी मुद्दे पर जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की संविधान सभा में भूमिका का खुलासा क्यों नहीं करते? 

5. मुसलमानों, ईसाइयों व पारसियों जैसे सभी अल्पसंख्यकों के धर्मों के कानूनी प्रावधानों को खत्म कर समान नागरिक संहिता बनाने का मोदी की अगुवाई में दिया गया आश्वासन यह क्यों नहीं बताता कि इस मुद्दे पर संघ के संस्थापक पिता श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने संविधान सभा की उपसमिति के समक्ष क्या लिखित राय जाहिर की थी?
6. संविधान के प्रावधानों के तहत अयोध्या में राममंदिर निर्माण का सावधानीपूर्वक दिया गया मोदी का कथन साथ-साथ यह क्यों नहीं कहता कि धर्मनिरपेक्षता को लेकर भी उनका नेतृत्व संविधान की उद्देशिका का बिना शर्त पालन करेगा?
7. अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में भाजपा ने गांधीवादी समाजवाद को घोषणापत्र में पार्टी का मुख्य मकसद बताया था। क्या वजह है कि मोदी की अगुवाई में गांधीवाद और समाजवाद जैसे शब्दों का उनके बहुप्रचारित घोषणापत्र में उल्लेख तक नहीं हुआ?
8. भाजपा और संघ परिवार बल्कि पूरे देश को प्रचारतंत्र में अपने से बौना बनाने की कोशिश करते मोदी क्या यह बताएंगे कि उन्हें वर्तमान संसदीय प्रणाली के बदले अमेरिका जैसी राष्ट्रपति प्रणाली लागू करने की इच्छा होगी? साथ ही लोकतंत्र में अटल बिहारी वाजपेयी ने जर्मनी जैसे समानुपातिक प्रतिनिधित्व का सुझाव दिया था। इस पर मोदी का क्या सोचना है?
9. क्या मोदी गुजरात में उनकी सरकार द्वारा सभी उद्योगपतियों से किए गए करार संबंधी फैसले और दस्तावेज़ सूचना के अधिकार अधिनियम का स्वेच्छा से पालन करते हुए जनहित में श्वेतपत्र प्रकाशित करेंगे?

10. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नारा बुलंद करने के बावजूद भाजपा का चुनाव प्रचार मुख्यतः अमेरिकी कंपनियों को ठेके पर दिया गया है। इसी तरह सरदार पटेल की स्मृति में बनने वाली विश्व की सबसे ऊंची लौह मूर्ति के प्रकल्प का ठेका भी अमेरिकी कंपनी को दिए जाने के आरोप हैं। क्या इस संबंध में मोदी अपनी दृष्टि स्पष्ट करना चाहेंगे?

(रविवार में प्रकाशित लेख पर आधारित) 

1 comment:

रश्मि प्रभा... said...

http://www.parikalpnaa.com/2014/07/blog-post_11.html