Thursday 17 June 2010

माओवादी इंसान नहीं, जानवर से भी बदतर!

मुझे अलग से कुछ नहीं कहना है। बस दो तस्वीरें लगा रहा हूं। पहली तस्वीर बुधवार की है जिसमें हमारे सिपाही पश्चिम बंगाल में इनकाउंटर के दौरान मारी गई एक महिला माओवादी को ढोकर ले जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर देश की नहीं, विदेश की है जिसमें एक मरे हुए सुअर को दो लोग ढोकर ले जा रहे हैं।



14 comments:

अनुनाद सिंह said...

कहाँ हो मानवाधिकारवादी गद्दारों ?

आचार्य जी said...

तुलनात्मक चित्र।

P.N. Subramanian said...

क्या मृत लोगों को ढोने किये कोई आचारसंहिता नहीं है?

Suresh Chiplunkar said...

भारत के वीर सैनिकों को एक बार बांग्लादेश की सेना ने भी ऐसे ही लटकाकर भेजा था…

संजय बेंगाणी said...

माओवादी हमारे सैनिकों के साथ कैसा व्यवहार करते?

Mired Mirage said...

मुझे माओवाद से कोई सहानुभूति नहीं है किन्तु मरे हुए तो शत्रु को भी आदर से विदा किया जाता है। यह फोटो देख मुझे भी लिखने का मन था।
मृतक को ले जाने का यह तरीका बेहद आपत्तिजनक तो है ही, सरकार व सरकारी लोगों का यही रवैया नक्सलवादी बनाने में सहायक है। वैसे किसी दुर्घटना के बाद भी जिस तरह से मृतकों व घायलों को उठाया जाता है वह किसी विकसित या विकासशील देश को नहीं एक हजार साल पहले के युग में जीने वालों को दर्शाता है।
इस फोटो पर आपत्ति होनी ही चाहिए।
घुघूती बासूती

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

उफ्!

शायदा said...

घूघूती जी से पूरी तरह सहमत। इस तरीके का विरोध करना बनता ही है। मेरी भी आपत्ति दर्ज करें।

talib د عا ؤ ں کا طا لب said...

same same
oh!!

shame!!shame!

व्योम said...

धन्यवाद रघु जी, इस युद्ध में अपनी स्थिति साफ़ करने के लिए|

हम तो भारत की ही तरफ थे, हैं और रहेंगे|

आप इस देश का नमक खाकर जारी रखें गद्दारी| आपकी मर्जी| हां ब्लॉग का नाम "एक नक्सलवादी की डायरी" रखें तो ज्यादा सार्थक रहेगा| डर-डर कर क्या समर्थन करना|

कभी समय मिले तो ७६ शहीदों की लाशों के चित्र देखना| उस समय तो आपकी जबान नहीं खुली| हम सब समझते हैं|

Ashoke Mehta said...

मेरे विचार से तो ऐसे चित्र लगा कर सिर्फ नक्सलवादियों की ही सहानुभूति प्राप्त कर सकते हैं , कभी आम जनता के विचारों को भी जानने का प्रयास कीजियेगा, जो नक्सलवादियों के अत्याचारों, ट्रेन उड़ाने की वारदातों और रोज- रोज के बंद के इनके फरमानों से परेशान है|

मुनीश ( munish ) said...

I think Ashok, Vyom, Suresh and Sanjay have a point to be noted and i support these gentlemen .

aagaz..........nayi kalam se said...

dil ko jhakjhorne wali taswir.....bhut dardnak...

चंदन कुमार मिश्र said...

विचित्र लोग हैं…इस चित्र पर आदमियत नहीं पुलिस की मजबूरी दिख रही है सुरेश जी को…विवाद बढ़ सकता है वरना बहुत कुछ कह जाते…